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नटवरलाल जिसने ३ बार ताजमहल बेच दिया और लाल किला, राष्ट्रपति भवन , और संसद भवन भी बेच दिया |

नटवरलाल natwarlal

 

कौन है नटवरलाल ?

नटवरलाल natwarlal

मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव जिसे ज्यादातर नटवरलाल के नाम से जाना जाता है, एक विख्यात भारतीय शख्स व्यक्ति(Indian Man) जो बार-बार ताजमहल, लाल किला, और राष्ट्रपतीय भवन और इसके संसद भवन  के सदस्यों के साथ “बेचने ” के लिए जाना जाता था।

उनका जन्म बिहार के सिवान जिले के बांगरा गांव में हुआ था, पेशे से वह एक Con Man बनने से पहले एक वकील थे।

उन्होंने सैकड़ों लोगों को करोड़ रुपए का धोखा दिया और खुद को छिपाने के लिए 50 से अधिक
उपनामों का इस्तेमाल किया। वे प्रच्छन्न थे और लोगों को धोखा देने के लिए उपन्यास विचारों का
इस्तेमाल करते थे। वह प्रसिद्ध व्यक्तियों के हस्ताक्षर बनाने में भी एक मास्टर थे। उन्होंने कहा कि
उन्होंने टाटा, बिड़ला और धीरूभाई अंबानी सहित कई उद्योगपतियों को धोखा दिया है
जिससे उन्हें नकद में भारी धन मिला, सामाजिक कार्यकर्ता या ज़रूरत से भरा व्यक्ति बन गया।
इसके अलावा उन्होंने लाखों रुपये के साथ कई दुकान-मालिकों को धोखा दिया था,
चेक और डिमांड ड्राफ्ट द्वारा उन्हें भुगतान किया, जिसे बाद में जाली में पाया गया।

ताजमहल, संसद भवन , राष्ट्रपति भवन बेचा 

natwarlal नटवरलाल

ताजमहल जैसे खुबसूरत ईमारत को देख कर आप यही कहोगे की ये ईमारत बेश कीमती है,
मगर आपको ये सुनने में कैसे लगेगा अगर मैं ये कहूँ के ताजमहल को नटवरलाल ने खड़े खड़े ३ बार बेचा था,
नटवरलाल ताजमहल के आस पास एक सरकारी ऑफिसर के ड्रेस में घूमता रहता था,
उसकी नजर हमेशा उन विदेशियों पर रहती थी जो देखने में काफी अमीर लगते थे,

नटवरलाल उन विदेशियों से बात करता था और बातों बातों में ये बताता था की
भारतीय सरकार ताजमहल बेचना चाहती है अगर उसका कोई सही कीमत देने वाला मिले तो ,
और नटवरलाल के झांसे में ३ विदेशी आ गए और नटवरलाल ने भारी रकम लेके ताजमहल बेच दिया,
जिस तरीके से नटवरलाल ने ताजमहल बेचा था, उसी तरीके से उसन लाल किला (Red Fort) दो बार बेचा था,
और यही नहीं अपने आजमाए हुए तरीकों से उसने राष्ट्रपति भवन , और संसद भवन ( Parliament House of India) को भोले भले विदेशियों को बेच दिया | यही नहीं संसद भवन को तो नटवरलाल ने ५४५ मेम्बेर्स के साथ  में  बेच दिया था |

हर बार नटवरलाल एक ही तरीका इस्तेमाल कर सरकारी अफसर बन कर विदेशियों को लुटता था,
राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को  बेचने के लिए नटवरलाल ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के  हस्ताक्षर की नक़ल की |

नटवरलाल  ने कई ज्वेलेर्स को भी अपने शिकंजे में ले लिया था, वह उनके सामने किसी बड़े नेता के पि ए (P.A) के रूप में जाता था और कीमती गहने खरीद कर उनसे कहता की आप दो आदमियों को मेरे साथ भेजो मैं पेमेंट डिमांड ड्राफ्ट के जरिये करूँगा , और जौहरी भेज दिया करता था और नटवरलाल हुबहू असली डिमांड ड्राफ्ट की नकली डिमांड ड्राफ्ट बना कर उन्हें दे देता था | इसी तरह उसने कई जोहरियों को लाखों का चुना लगाया |

पुलिस ने नटवरलाल को पकड़ा था 

पुलिस ने उसे नौ बार पकड़ा मगर हर बार वह चतुराई से भाग जाया करता था | वह जालसाजी के 14 मामलों के लिए दोषी ठहराया गया था और 113 साल के लिए सजा सुनाई थी, लेकिन वह शायद ही कम से कम 20 साल जेल में बिताए होंगे | पिछली बार उन्हें गिरफ्तार किया गया था 1996 में और उस समय 84 वर्ष का था। लेकिन उन्होंने पुलिस को पर्ची देने के लिए दोबारा काम किया और पिछली बार 24 जून, 1996 को अधिकारियों ने इसे देखा। जब व्हीलचेयर का उपयोग करते हुए अष्टकोनायक(octogenarian) का इलाज करने के लिए जेल से अस्पताल ले जाया जा रहा था| वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर गायब हो गए, जब उन्हें एम्स (AIIMS)में ले जाया गया, कानपुर जेल से उसके इलाज के लिए पुलिस अनुरक्षण के तहत,

जिसके बाद उन्हें फिर कभी नहीं देखा गया।

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